गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरु ने लोह लगा दी मेरा बेठन ने जी करता,

गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी,

कोई किसे का सुथरा को न चाहे कितना धंधा करले

गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी,

कोये किसी की सासु को न चाहे कितनी सेवा करले,

गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी,

कोई किसे का बेटा को चाहे कितना भी दूध पीला ले,

गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी,

कोई किसे की बहु कोई न चाहे सारा घर सौंप दे ,

गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी,

कोई किसे की बेटी कोई न चाहे कितना देना करलो,

गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी,

कोई किसे का मर्द नहीं है चाहे काड कालजा धार दो,

गुरु जी मने पार तार दे फिर रोज रोज आउंगी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।