कानूड़ा लाल घड़लो महारो भरदे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे ,

भर दे, ऊंचा दे, सर पर धर दे रे ,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे,

तू मत जाणी कान्हा, आई मैं अकेली,

सात सहेलियां म्हारे संग छे रे ,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे,

तू मत जाणी कान्हा, दूर गाँव की ,

बरसाने म्हारो घर छे रे ,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे,

तू मत जाणी कान्हा, अकन कंवारी ,

श्री कृष्ण म्हारो वर छे रे ,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे,

चन्द्रसखी ब्रजपाल कृष्ण छवि,

हरि के चरणों मे महारो चित स रे,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे

भर दे, ऊंचा दे, सर पर धर दे रे ,

कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे,

संपादक:-विजय डिडवानिया

सरदारशहर

9511539933

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।