भोले ओ मेरे भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले तेरी जटा से बहती है धार गंगा,

गंगा जल के स्पर्श से हो जाता काम चंगा,

भोले ओ मेरे भोले नथो के नाथ भोले

भोले ओ मेरे भोले संग डमरू ले तू डोले,

भोले तेरी जटा से बहती है धार गंगा,

कैसी है तेरी महिमा तेरा पर्वतो पे डेरा,

भूतो से तेरी यारी तू है तिरशूल धारी,

कैसी है तेरी महिमा तेरा पर्वतो पे डेरा,

भूतो से तेरी यारी नंदी तेरा सवारी

भोले ओ भोले

नैनो से बहते आंसू आंसू से बने मोती,

मोती की रुदर माला माला में सारे जोगी

नैनो से बहते आंसू आंसू से बने मोती,

मोती की रुदर माला माला में सारे जोगी

करता है जब तू तांडव काँप उठ ती है,

दुनिया सारी बस इक बेल पत्र से हो जाता है बलिहारी,

श्मशान के निवासी घट घट के तुमहो वासी,

दर्शन को तेरे प्यासी दुनिया ये तेरी दासी,

भोले ओ मेरे भोले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।