यशोदा मैया खोल कीवडिया लालो आयो गाय चराय

संत सूरदास
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

यशोदा मैया खोल किवड़िया,

लालो आयो गऊ चराय,

गऊ गोप ग्वालन गऊ संग , बंशी मधुर बजाय,

सुन गोपी जन मन हर्षित भई, चढ़ी अटारी जाय,

यशोदा मैया खोल किवड़िया--

यशोदा मैया करे आरती , फूली नाय समाय,

हँस -हँस लेत बलैयाँ मैया, बार बार बली जाय .

यशोदा मैया खोल किवड़िया---

खिडक खोल कर दीन्ही गईया , बछड़ा रहे चुखाय ,

कारी काजर, धोरी धूगर को रहयो दूध दुहाय

यशोदा मैया खोल किवड़िया--

दुध दुहाय कहे मनमोहन, माखन दे रही माय,

सदलोनी तो होए सवेरो लाला ,पीओ दूध अधाय

यशोदा मैया खोल किवड़िया-----

इतने में एक सखी साँवरी , टेरण पहुँची आय

गोविन्द मोको दूध ना देवे, गैया रही रम्भाय

यशोदा मैया खोल किवड़िया---

सखी साँवरी की मनमोहन ने , जाय दुहाई गाय

आधो दूध दोहन में डारो, आधो रह्यो चढ़ाय

यशोदा मैया खोल किवड़िया---

सखी साँवरी कहने लागी , मधुर-मधुर मुस्काय

सूर श्याम यशोदा के लाला , नित्य दुहावन जाय

यशोदा मैया खोल किवड़िया---

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।