दरबार में सचे सतगुरु के दुख दर्द मिटाए जाते है

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॥ पावन पाठ ॥

दरबार में सचे सतगुरु के दुख दर्द मिटाए जाते है,

ये महफ़िल है मस्तानो की हर शख्श याहा पर मतवाला,

भर भर के जाम इबातात के,

याहा सब को पिलाए जाते है,

दरबार में सचे सतगुरु के दुख दर्द मिटाए जाते है,

इल्ज्म लगने वालो ने इल्जाम लगाये लाख मगर,

तेरी सोगात समज कर के हम सिर पे उठाये जाता है,

दरबार में सचे सतगुरु के दुख दर्द मिटाए जाते है,

जिन बन्दों आर एह जग बालो हो ख़ास इनायत सतगुरु की,

उनको ही संदेसा आता है और वे ही बुलाये जाते है

दरबार में सचे सतगुरु के दुख दर्द मिटाए जाते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।