रंग बरसे लालो लाल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंग बरसे लालो लाल मेरी माँ सिंदूरी दे दर ते,

रंग बरसे लालो लाल

मात वैष्णो दे दर ते रंग बरसे लालो लाल

दसा की इस रंग दे वारे इस रंग ने कई लखा तारे,

जिस नु एह रंग चढ़ जांदा ओह हो जाए मालो माल,

मेरी माँ सिंदूरी दे दर ते,

रंग बरसे लालो लाल

कर्मा भागा वालेया दे माँ दर गोरे कालेया ने इको रंग विच रंग जांदे ने,

सब लगदे बड़े कमाल,

मेरी माँ सिंदूरी दे दर ते,

रंग बरसे लालो लाल

रेखा शर्मा एह रंग रंगके इहो मुरादा माँ तो मंग के,

गेजी कहंदा चरनी लग के हो जान हल सवाल,

मेरी माँ सिंदूरी दे दर ते,

रंग बरसे लालो लाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।