गुफा दे उते चलो चलिए

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॥ पावन पाठ ॥

जय गुफा वाले नाथ दी मैं बोल के,

पाइया जोगी तो मुरदा दिल खोल के,

पूरा किता हर जिंगदी दी लोड नु,

भेटा जोगी दी ऊंची ऊंची बोल के,

गुफा दे उते चलो चलिए,

बैठा नाथ यह गुफा दे बूहे खोल के ,

गुफा दे उते पेन भंगड़े देखे नाथ भी

गुफा दे बूहे खोल के ,

गुफा दे उते पेन बोलियां देखे नाथ भी गुफा दे बूहे खोल के ,

बड़ी लग दी प्यारी गुफा नाथ दी लाल झंडे गुफा दे बड़े सजदे ,

सदा जिंदगी च मौजा लूट दे जेहड़े जोगी दे भरोसा सदा रखदे,

मजा वखरा है अमृत वाणी दा बड़ा देख लिया जिंदगी नु रोल के

गुफा दे उते चलो चलिए,....

फूल किरपा है गुफा वाले नाथ दी कारा कोठिया ते द्वितीय ने गड्डियां,

हूँ मंगदे ने मेरे कोलो माफियां माडे टाइम विच गाला जिह्ना कड़ियाँ

मैनु मेरे जोगी उते बड़ा मान है बंद ताले किस्मत वाले खोलते,

गुफा दे उते चलो चलिए,

असि नौकरी जोगी दी करदे कर दा मुरादा पुरिया ताहियो नच नच पोडियां चढ़ दे

झंडे है सजा के गोटे नाल पैर पैर ते जोगी दी जय करदे,

अश्वनी लुधियाने वाला भी बने नौकर जोगी दे दर दे,

गुफा दे उते चलो चलिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।