भावना की ज्योत को जगा कर देख ले

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॥ पावन पाठ ॥

भावना की ज्योत को जगा कर देख ले

बोलती है मूर्ति बुलाके देखले,

सो वार चाहे आजमाके देख ले,

बोलती है मूर्ति बुलाके देखले,

करोगे यो सवाल तो जवाब मिलेगा,

यहाँ पुण्य पाप सबका हिसाब मिलेगा,

भले बुरे सब को ही जानती है वो,

खरी खोटी सबकी पहचानती है वो,

श्रद्धा से सिर को जुका के देख ले,

बोलती है मूर्ति बुलाके देखले,

छाया में है छुपी जो बैठी धुप में ,

मैया का होता दर्शन किसी भी रूप में

होगा हर जगह एहसास उसका ,

तेरे विश्वास में निवास उसका ,

जिस और नजरे घुमा के देख ले,

बोलती है मूर्ति बुलाके देखले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।