आओ आओ सावरिया बेगा आओ जी मोजी भोग लगाओ

लखबीर सिंह लक्खा
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मीठो है नमकीन है बाबा चरपरो थोड़ो खाटो

सोने की थाली में परोसेयो ढाल चांदी को बाटो

टाबरिया मनोहार करे बाबा देखूं थे कहीया नाटो

भोग लगाओ श्याम धनि रे थारा बाकि भक्ता ने बांटो

आओ आओ सावरिया बेगा आओ, जी मोजी भोग लगाओ,

है छप्पन भोग तैयार जी, थारा टाबरिया करे मनुहार जी,

केसरिया बरफी कलाकंद रबड़ी पैड़ा इमरती बालूशाही,

लड्डू बूँदिया जलेबी रसगुल्ला गाजर पाक रसमलाई,

गुलाब जामुन शकरपारा घेवर न्यारा न्यारा,

जिमन आओ ना तोरा और घलबो,

है छप्पन भोग तैयार जी,

तारा टाबरिया करे मनोहार जी...

दाल मोठ पकोड़ी कचोरी भुजिया पापड़ चिवड़ो

कढ़ी राबड़ी साग सांगरी को बाजरे का बाबा खीचड़ो,

रायता में जीरा को तडको पीओ मार सबरको,

साग काचरे की चट्नी चटाओ जिमो जिब हॉग लगाओ,

है छप्पन भोग तैयार जी,

थारा तबरिया करे मनोहार जी,

काजू किस्मीस नोजा खुरमानी खोपरा चुवारा बादाम लेओ,

जिम जुट और आचमन करके फिर थोरी आराम लेवो,

सौंफ एलाईची हाजिर कर दी सागे मिशरी धर दी,

सोई नागरिया पान चवाबो जिमो जी भोग लगाओ,

है छप्पन भोग तैयार जी,

थारा तबरिया करे मनोहार जी,

आम अमरूद अंगूर अनानास आलू बुखारा अनार धरिया,

केला सेब पपीता चिकू संतरा मौसम्बी रसधार धारिया,

काकड़िया रे लाल मतिरा तर टमाटर खीरा

नींबू खाटो थोड़ो चिडकाओ जिमो जी भोग लगाओ,

है छप्पन भोग तैयार जी,

थारा तबरिया करे मनोहार जी,

छप्पन भोग परोसया तारे भागता श्याम घनी स्वीकार करो,

सरल बावलो महिमा गावे अन्न धन्न से भंडार भरो,

लिली थारी सब जाग जानी थे हो शीश का दानी,

बिगड़ी लख्खा की थे हो तो बनाओ जिमो जी भोग लगाओ,

है छप्पन भोग तैयार जी,

थारा तबरिया करे मनोहार जी,

Uploaded By - रितेश कुमार राठौर ( जीरापुर 9806784964 )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।