पौनहारी दूधाधारी आखे दुनिया

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सिंगियाँ वाले तो मैं जावा सदके,

भूल बकछावा चरना च लग के,

मंगवा नहीं सी कोई साइकिल दिंदा आज कर ता जहाज ते सवार,

पौनहारी दूधाधारी आखे दुनिया नि मैं जोगी जोगी आखा बार बार,

लक ते लंगोट तेरे रंग सुहा लाल वे,

कैसा मतवाला एह तू रत्नो दे लाल वे,

तीन लोक विच तेरे चर्चे ने होंगे आज चारे पास होगी जय जय कार ,

पौनहारी दूधाधारी आखे दुनिया नि मैं जोगी जोगी आखा बार बार,

भोले दा भगत वे तू गौए दे ग्वालिया मोर ते सवार होक उड़ जान वेल्या,

इक वारि जेहड़ा तेरे दर उते आवे तू ता भर भर भरदा भंडारे,

पौनहारी दूधाधारी आखे दुनिया नि मैं जोगी जोगी आखा बार बार,

बोह्डा विचो रोटियां दे ढेर लान वालेया

वारे वारे जावा जुना ग़ड वालेया,

डरदे ने देखे बाबा लखा ने भगत निगहहेररी ते भी मेहरा वाली मार,

पौनहारी दूधाधारी आखे दुनिया नि मैं जोगी जोगी आखा बार बार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।