ऊंचा दरबार मैया दा सुचा दरबार

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ऊंचा दरबार मैया दा सुचा दरबार,

निवेया निमानिया न स्याणेया न्यानेया नु मिले जीथो प्यार,

ऊंचा दरबार मैया दा सुचा दरबार,

खोटे असि सीके आ बना दे साहनु खरे माँ,

शेर ते सवार होके आजा साढ़े घरे माँ,

हर चोहंदे नैन तेरा ही दीदार,

ऊंचा दरबार मैया दा सुचा दरबार,

असि ज्योति वालिये गुलाम तेरे दर दे ,

होके दया वान माँ तू कज लेंदी परदे,

पिरदी सयो ते तेरे बड़े उपकार,

ऊंचा दरबार मैया दा सुचा दरबार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।