घर मुड़ आ जोगियां वे

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॥ पावन पाठ ॥

घर मुड़ आ जोगियां वे माँ उडीका करदी आ ,

तेरी याद च पुत्रा वे रो रो होंके भरदी आ,

घर मुड़ आ जोगियां वे माँ उडीका करदी आ ,

तेरी याद च रोंदी दे हथे बहा बजैया वे,

हथ खाली मुड़ आई किते तू न लभेया वे,

तेरे बिना बालका वे जींद जांदी थर दी आ

घर मुड़ आ जोगियां वे माँ उडीका करदी आ ,

पुत्ता नु मावा वे सो वारि घुरड़िया,

तू रूस के माँ नाल वे बाटा तुर गया दूर दियां,

मेरा तेरे बिन पुत्रा हूँ कोई न दर्दी आ,

घर मुड़ आ जोगियां वे माँ उडीका करदी आ ,

की होया माये ने राती पुछदे तारे ने,

जोगी रूस के तुर गया है मैं मेहने मारे ने

पीछे लग गई लोका दे ताहि दुखड़े जर दी आ,

घर मुड़ आ जोगियां वे माँ उडीका करदी आ ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।