एसी और न कमाई ऐसा और न खजाना

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॥ पावन पाठ ॥

कर प्यार हर प्राणी से है प्यार का जमाना,

एसी और न कमाई ऐसा और न खजाना,

बात खो लिया तप कर के जग दान भी है करता,

प्यार का लेस न दिल में क्यों ये चोरासी में फिरता,

किस भूल में विचरता ये बात न बुलाना

एसी और न कमाई ऐसा और न खजाना,

दिल बात बता देता जो दिल में चोर है होता,

प्यार के जीवन का जग में कुछ मजा और है होता,

वो नर ही भिभोर है होता जो माया का दीवाना,

एसी और न कमाई ऐसा और न खजाना,

प्यार के रस्ते वो ही चलेगा जो भी पूरा हो,

चलके देख दियां जिस ने अलग जहूरा हो

ये सूरा है तेरे रन में तू पीठ न दिखाना,

एसी और न कमाई ऐसा और न खजाना,

पूजा प्यार की जग में है उत सब से प्यार कर भाई,

मुर्ख जगनाथ की ते इक बात समज में आई ,

कर प्यार की कविताई गा प्यार का ही गाना,

एसी और न कमाई ऐसा और न खजाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।