खबर नही है पल की बात करे तू कल की

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॥ पावन पाठ ॥

खबर नही है पल की बात करे तू कल की,

गफलत में खोया है शरण में आ गुरु जन की,

खबर नही है पल की बात करे तू कल की,

सब की यही कहानी है आया है सो जाएगा,

यत्न भले इतना करले खाली हाथ ही जाएगा,

संग चलेगी तेरी गटरी तेरे कर्मन की,

गफलत में खोया है शरण में आ गुरु जन की,

खबर नही है पल की बात करे तू कल की,

कपट कर्रु इस दुनिया ने तुझको बहुत लुभाया है,

होश में आजा रे मनवा ये तो फिर छिलावाहै,

सुख मिलता इक छन का बेचैनी हर पल की,

गफलत में खोया है शरण में आ गुरु जन की,

खबर नही है पल की बात करे तू कल की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।