मेहर करो न देर करो

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॥ पावन पाठ ॥

मेहर करो न देर करो मेरे पौनहारी जी,

दुःख बड़े ने बूहे आन खड़े ने सूखा वाली सवेर करो मेरे पौणाहारी जी,

मेहर करो न देर करो मेरे पौनहारी जी,

चेत महीना आ गया न तेरे दर्शन होये.

राह सुने पाये तेरी गुफा दे तक़ नैन भी रोये

दर सद ले जोगियां रूह तेरी हो गैया

सद ले जोगियां तेरी हो गई हूँ रौनक बाबा फेर करो मेरे पौनहारी जी,

मेहर करो न देर करो मेरे पौनहारी जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।