सँवारे से मेरी मुलाक़ात हो गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सखी सपने में एक अनोखी बात हो गई,

सँवारे से मेरी मुलाक़ात हो गई ,

मैं तो गहरी नींद में सोइये रही रही,

उस प्यारे के सपनो में खोये रही थी,

सखी कैसे मैं बताओ करामात हो गई,

सँवारे से मेरी मुलाक़ात हो गई ,

धीरे धीरे वो पास मेरे आने लगे,

मुझ बिरहँ को दिल से लगाने लगे,

मेरी आखियो से अश्को की बरसात हो गई,

सँवारे से मेरी मुलाक़ात हो गई ,

मैंने सोचा अब अपने मैं दिल की कहु,

ये जुदाई का दर्द अब कितना सहू

यही सोचते ही सोचते परभात हो गई,

सँवारे से मेरी मुलाक़ात हो गई ,

अपने साजन की पागल दीवानी हुई,

ऐसी चित्र विचित्र की कहानी हुई,

मिली उसकी झलक ये सोगात हो गई

सँवारे से मेरी मुलाक़ात हो गई ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।