मन मस्त फकीरी धारी है

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॥ पावन पाठ ॥

मन मस्त फ़कीरी धारी है

अब एक ही धुन जय जय भारत ॥

हम धन्य है इस जगजननी की

सेवा का अवसर है पाया

इसकी माटी वायु जल से

दुर्लभ जीवन है विकसाया

यह पुष्प इसी के चरणोमे

माँ प्राणो से भी प्यारी है ॥

सुन्दर सपने नव आकर्षण

सब तोड चले मुख मोड चले

वैभव महलों का क्या करना

सोते सुख से आकाश तले

साधन की ओर ना ताकेंगे

काँटों की राह हमारी है ॥

ऋषियों मुनियों संतो का तप

अनमोल हमारी थाती है

बलदानी वीरो की गाथा

अपने रग रग लहराती है

गौरवमय नव इतीहास रचे

अब अपनी ही तो बारी है ॥

संपादक:-विजय डिडवानिया

सरदारशहर

9511539933

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।