आ जोगियां वे कदे रत्नो दे वेहड़े

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॥ पावन पाठ ॥

तनु मेहने मार बैठी हूँ रोनी आ मैं बैठी,

जद दा छड़ के गया है सुख लगे भी नहीं मेरे,

आ जोगियां वे कदे रत्नो दे वेहड़े,

एडा होया की कसूर दस रत्नो माई तो,

वे मैं मर मर जावा बिना ही आई तो,

तेरे पेंदे ने भुलेखे बैठा धुनें दे नेड़े,

आ जोगियां वे कदे रत्नो दे वेहड़े,

तनु लाड मैं लड़ावा हठी चुरिया खवावा,

तेरे आऊं दी ख़ुशी च मोर मिटटी दे बनावा ,

वे तू लभ दा किते नि फोले जंगल बथेरे,

आ जोगियां वे कदे रत्नो दे वेहड़े,

तेरे जान दा दे पुत्ता दुःख होया एडा भारा मैनु मोड़ा दें वाला बस तू ही सहारा,

भावे विर्दी तो पूछी तनु चेते कर रोवा हंजू गौए ने भी गेरे,

आ जोगियां वे कदे रत्नो दे वेहड़े,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।