मेरे दुखड़े सुनेगा मना ता जोगियां

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॥ पावन पाठ ॥

घर रोट मैं बनावा तनु भोग लगावा,

सब दुखी भगता दी फडे बाह जोगियां,

मेरे दुखड़े सुनेगा मना ता जोगियां,

तेरी गुफा ते आया कोई भी मूड दा न खाली,

सारी दुनिया केहन्दी तनु रत्नो दा पाली,

तू दत्तात्रे दा चेला रखे चेत विच मेला,

तेरे बोहड़ा दी गुड़ी ते ठंडी छा जोगियां,

मेरे दुखड़े सुनेगा मना ता जोगियां,

चेला बन जा गोरख नाथ ने जोर लगाया सी,

तू उड़ गया विच हवा दे तनु रोक न पाया सी,

ओहने लभेया बथेरा पता लगैया न तेरा,

ओहदा तूतिया हंकार उस था जोगियां,

मेरे दुखड़े सुनेगा मना ता जोगियां,

धुनें दीप भभूति जो भी माथे लौंडा है,

पूरियां हों मुरादा जो गुण तेरे गाउँदा है,

तेरे बचैया गरीब साढ़े खोल दे नसीब,

तेरे नाम दी सिंगी लई गल पा जोगियां,

मेरे दुखड़े सुनेगा मना ता जोगियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।