होली कैसे मनाऊ सजना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे इश्क़ का कैसा है खुमार रे मैं तो चाहु बस तेरा ही दीदार वे,

होली कैसे मनाऊ सजना रंग तेरे प्यार का चढ़ा दूजा रंग नहीं भाये साजना,

तू रहता काश मेरे आस पास मैं और स्वर जाती,

मेरे अंग अंग में चढ़ता रंग कुछ और निखर जाती,

बिन सजना मेरा सजना अब है किस काम का,

ये रंगो का मौसम बस है तो है बस नाम का,

हाल किसको बताओ सजना रंग तेरे प्यार का चढ़ा दूजा रंग नहीं भाये सजना,

होली कैसे मनाऊ सजना रंग तेरे प्यार का चढ़ा दूजा रंग नहीं भाये साजना,

सो है सवाल तू आ संभाल मैं अधूरी तेरे बिन,

मुझे कर दे लाल मलदे गुलाल यही चाहु रात दिन,

मेरी आहे निगहाए तुझे ढूंढे हर जगह

तड़पाओ न ऐसे अब मुझको बेवजह,

नैना किस से लडाऊ सजना,रंग तेरे प्यार का चढ़ा दूजा रंग न भाये सजना,

होली कैसे मनाऊ सजना रंग तेरे प्यार का चढ़ा दूजा रंग नहीं भाये साजना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।