एक तू ही भरोसा एक तू ही सहारा

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॥ पावन पाठ ॥

एक तू ही भरोसा एक तू ही सहारा,

इस तेरे जहां में नहीं कोई हमारा,

ईश्वर या आल्हा ये पुकार सुन ले,

ईश्वर या आल्हा हे दाता

हम से न देखा जाए बर्बादियों का समा,

उजड़ी हुई बस्ती मे ये तड़प रहे निशाँ,

नन्हे जिस्मो के टुकड़े लिए खड़े है एक माँ,

बारूद के दुए में तुहि बोल जाए कहा,

एक तू ही भरोसा एक तू ही सहारा

नादां है हम तो मालिक, क्यों दी हमें यह सजा

यहाँ है सभी के दिल में नफरत का ज़हर भरा..

इन्हे फिर से याद दिला दे सबक वही प्यार का

बन जाए गुलशन फिर से काँटों भरी दुनिया

एक तू ही भरोसा, एक तू ही सहारा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।