साई जी देयो दर्शन

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॥ पावन पाठ ॥

तुहाडे बिना उदास ने चेहरे,

आके वंड दो खुशियां खड़े,

आज दीद दी लगी भटकन जी देयो दर्शन,

देयो दर्शन अखियां तरसन दी देयो दर्शन,

संगता ने आज याद करदियां

हथ जोड़ फर्याद करदियां

रोक के दिला दी धड़कन जी देयो दर्शन,

साई जी देयो दर्शन

बैठे ने सब आस लगाई राह तूद्दे वल निगहा टिकाई,

तूद्दे बोल दिमाग च खड़कन जी देयो दर्शन

जिंगदी को उड़ गए ने हासे,

होके बह गये ऐसी निराशे,

यादा विच हंजू वर्सन जी देयो दर्शन

जे साडे सदेया न आये बैठे रहा गए असि भूखे बलाये

क्यों रूह नूर डरफन दी देयो दर्शन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।