भगवान है कहाँ रे तू

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॥ पावन पाठ ॥

है सुना ये पूरी धरती तू चलता है

मेरी भी सुन ले अरज मुझे घर बुलाता है

भगवान है कहाँ रे तू

हे ख़ुदा है कहाँ रे तू

है सुना तू भटके मन को राह दिखाता है

मैं भी खोया हूँ मुझे घर बुलाता है

भगवान है कहाँ रे तू

हे ख़ुदा है कहाँ रे तू

मैं पूजा करूँ या नमाजे पढूं

अर्दासें करूँ दिन रेन

ना तू मंदिर मिले, ना तू गिरजे मिले

तुझे ढूंढें थके मेरे नैन

जो भी रस्में हैं वो सारी मैं निभाता हूँ

इन करोडो की तरह मैं सर झुकता हूँ

भगवान है कहाँ रे तू

हे ख़ुदा है कहाँ रे तू

तेरे नाम कई, तेरे चेहरे कई

तुझे पाने की राहें कई

हर राह चला पर तू ना मिला

तू क्या चाहे मैं समझा नहीं

सोच बिन समझे जतन करता ही जाता हूँ

तेरी ज़िद सर आँखों पर रख के निभाता हूँ

भगवान है कहाँ रे तू

हे ख़ुदा है कहाँ रे तू

है सुना ये पूरी धरती तू चलता है

मेरी भी सुन ले अरज मुझे घर बुलाता है

भगवान है कहाँ रे तू

हे ख़ुदा है कहाँ रे तू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।