तनधन बाबो सेठ म्हारी नारायणी सेठानी है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तनधन बाबो सेठ म्हारी नारायणी सेठानी है

तनधन बाबो सेठ म्हारी नारायणी सेठानी है

ये तो झुंझुनू के महरानी है...

तनधन बाबो सेठ...

मॉँग के तू देख, सर ने झुका के देख दादी के द्वार पे

पल में बदल देसी माँ तकदीरारी रे जो आया द्वार पे

बाँट रही पर्चा

बाँट रही पर्चा, झूठी ना ही ये कहानी है

ये तो झुंझुनू के महारानी है...

दुःख में सुमिररन कर या सुख में सुमिरन कर, आवेगी मावड़ी

भक्ता के सागे जो रिश्तो बनायो है, निभावेगी मावड़ी

इह खातिर ही तोह आकि दुनिया दीवानी है

ये तो झुंझुनू के महारानी है...

या कुलदेवी म्हारी सारे जग से न्यारी है भक्ता ने प्यारी है

ममता लुटावे है या साथ निभावे है या पालनहारी है

श्याम जो गावे

श्याम जो गावे या तो आकि मेहेरबानी है

ये तो झुंझुनू के महारानी है...

गायिका : ज्योति जाजोदिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।