रतनो दा लाल दिखियाँ

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॥ पावन पाठ ॥

जोगियां दे कना विच कच दियां मुंदरा

कच दियां मुंद्रा ते ॐ लिखियाँ

मेनू चारे पासे रतनो दा लाल दिखियाँ,

वेख्या मैं दुनिया दा वाली गोआ चार दा,

बोह्डा थले बेठा वाजा मोरा नु सी मार दा,

मेनू कमली नु पोतक कमाल दिखियाँ,

मेनू चारे पासे रतनो दा लाल दिखियाँ,

हे सिर ते सुन्हेरी ओहदे सोहनदियां सी कुंडला

विरदी दा मन चित मोहन्दिया सी कुण्डला,

जांदा उड़ दा हवावा दा लाल दिखियाँ,

मेनू चारे पासे रतनो दा लाल दिखियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।