सवेरे वाली गाडी से चले जायेगे

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॥ पावन पाठ ॥

सवेरे वाली गाडी से चले जायेगे,

कुछ लेके जायेगे कुछ देके जायेगे

ये मेला दो घडी का दो दिनों की ये बहार,

समय की बेहती धार कहती जाती है पुकार,

मेहमान कब रुके है कैसे रोके जायेगे,

सवेरे वाली गाडी से चले जायेगे,

कुछ लेके जायेगे कुछ देके जायेगे

मिलो तो मिलो प्यार से बोलो तुम इक वार

हमारे बगभाग हुए तुम से मुलाक़ात,

मिलेगा कुछ तो दिल याहा टूट जायेगे,

कुछ लेके जायेगे कुछ देके जायेगे

सवेरे वाली गाडी से चले जायेगे,

निशानी कोई प्यार की तो छोड़ जायेगे,

कहानी कोई प्यार की तो जोड़ जायेगे,

बनेगे किसी के किसी के होके जायेगे

कुछ लेके जायेगे कुछ देके जायेगे

सवेरे वाली गाडी से चले जायेगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।