सम्भालो कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा रे ------कान्हा

तुम्ही मेरी नैया तुम्ही हो खिवैया

सम्भालो कन्हैया सम्भालो कन्हैया

डूब रहा हूँ देखो जग के रचैया

सम्भालो कन्हैया सम्भालो कन्हैया

क्या मैं बताऊँ क्या मैं दिखाऊं

आँखों का नीर कान्हा कैसे छुपाऊं

दुःख की चली रे कान्हा कैसी पुरवैया

सम्भालो कन्हैया सम्भालो कन्हैया

घिर गए आज देखो बदल काले काले

टूट रही हैं सांसें ओ मुरली वाले

कल क्या करोगे आके बंसी बजैया

सम्भालो कन्हैया सम्भालो कन्हैया

इतना तो कह दे कि मैं तेरा विश्वास हूँ

क्यों घबराता पगले तेरे आस पास हूँ

केशव भरोसे तेरे पकड़ो ये बैयां

सम्भालो कन्हैया सम्भालो कन्हैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।