मेरे जोगिया मैं ता तेरी जोगन हो गईया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे जोगिया मैं ता तेरी जोगन हो गईया

जोगन बन गयी आ मैं तेरी रोगन बन गयी आ

तेरा जोग लगा मुझे रोग लगा मैं हो गयी तेरी चल्ली आ

मैनु लोग कहन यमली पगली मैं केहन्दी श्याम दी कमली आ

प्रेम दीवानी मैं मस्तानी अरमा खो गयी आ

मेरे.......

तेरे होठ रसीले की कहना दो नैन मतवारे ने

तेरे तीर करारे चितवन दे मेरे लगे कलेजे सारे ने

ओ बेदर्दी दर्दी तेरे तीर ते मर गयी आ

मेरे.......

तू बांका दिलबर जानी है तेरी मेरी प्रीत पुरानी है

दिल लाया तेरे नाल सजन मैं लायी तू तोड़ निभानी है

तू ता मेरी कदर ना जानी दर दर रूल गयी आ

मेरे.......

मैं ज़िन्दड़ी तेरे नाम किती तू मेरे नाल वफ़ा कर ले

बिन तेरे गुजारा नहीं हुँदा एक बारी मेरी बाह फड़ ले

कौन सुने किसनू आखा मैं रुसवा हो गयी आ

मेरे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।