क्या कभी हमने सोचा था

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

क्या कभी हमने सोचा था के ऐसा भी हो पायेगा,

लोक रहेंगे घरो के अंदर कोई बाहर न जाएगा,

क्या कभी हमने सोचा था के पंषि यु चेहकाएगे,

पेड़ और पौधे शुद्ध हवा में मस्ती में लहराएंगे,

क्या कभी हमने सोचा था घर घर में गीता बाजेगे,

सपने में भी ना सोचा जी मोर शतो पे नाचेंगे,

क्या कभी हमने सोचा था प्रदूषण कम हो जाएगा,

गंगा यमुना का जल भी इतना निर्मल हो पायेगा,

क्या कभी हमने सोचा था पशु पक्षी खुश हो पाएंगे,

निकल जानवर जंगल से सड़को पे जशन मनाएंगे,

ना कभी हमने सोचा था इतनी लम्भी छूटी होगी

सारे काम छोड़ कर बस घर रहने की ड्यूटी होगी,

ना कभी हमने सोचा मुश्किल में खुशाली आएगी,

जनता दीप जलायेगी इक नई दीवाली आएगी,

क्या कभी हमने सोचा था ऐसा भी भगवान् करेंगे,

हां और फेस मिलाने वाले हाथ जोड़ परिणाम करेंगे,

क्या कभी हमने सोचा था क्या हम घर में ही महिमान होंगे,

चाहे गरीब हो चाहे अमीर हो सारे एक समान होंगे,

कभी न हमने सोचा था भारत इक जुट हो जाएगा,

देश के गदारो के मुख से पर्दा भी उठ पायेगा

क्या कभी तुमने सोचा था की ऐसा चमत्कार होगा,

भारत के आगे नतमस्तक ये सारा संसार होगा,

क्या कभी हमने सोचा था के ऐसे गीत बनायेगे,

कवी सिंह के नाम से दिल गदारो के जल जायेगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।