ऐसी रूहों को हमारा दिल से प्रणाम है

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॥ पावन पाठ ॥

औरों की सेवा करना बड़े भाव से सेवा करना जिनका पहला काम है

ऐसी रूहों को हमारा दिल से प्रणाम है

जिनको मिलती हैं खुशिया खुश औरों को देख कर

जिनको मिलता है सुख सुखो औरों को देख कर

निस्वार्थ सेवा करना जिनके चारों धाम है

ऐसी रूहों को हमारा दिल से प्रणाम है

जो अपना वार कर औरों के लिए जीते हैं

जज़्बा सेवा का धार कर औरों के लिए जीते हैं

आसान नहीं है ये तो बड़ा मुश्कि काम है

ऐसी रूहों को हमारा दिल से प्रणाम है

वो रहे सलामत ईश्वर से करते अरदास हैं

इक मालिक से दूजी उनसे हम सबको आस है

मुश्किल में जो हैं आते औरों के काम हैं

ऐसी रूहों को हमारा दिल से प्रणाम है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।