ना कभी भी किसी का दिल का दुखाना रे

कुमार विशु
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॥ पावन पाठ ॥

करना सेवा सत्कार, करना हर किसी से प्यार,

न कभी भी किसी का दिल दुखाना रे ।

लेके जग से बुराई मत जाना रे,

अच्छे कर्मो से जीवन सजाना रे ।

घर आये को भगवान् समझना,

अपने ही जैसा इंसान समझना ।

मीठी वाणी उसको बोल, वाणी होती है अनमोल ।

तीखी वाणी किसी को मत सुनाना रे ।

प्यार अपना सभी पे तू लुटाना रे ।

तुच्छ समझ किसी पर नहीं हंसना,

सब पे सम-रस भाव तुम रखना,

पढ़ना गीता का उपदेश, उसमे है जी ये सन्देश,

कहाँ रहता है एक सा ज़माना रे ।

भाव-भगति में मन को रमाना रे ।

पाप का धन अपने घर तू ना लाना,

खून-पसीने की रोटी ही खाना ।

मेहनत करना आठों याम, किरपा करेंगे तुझपे राम ।

सत्य-पथ से ना पग को डिगाना रे ।

बुरे कर्मों को हाँथ ना लगाना रे ।

मन में कभी तू अभिमान ना करना,

जग में किसी का अपमान ना करना ।

ऊपर होगा सब हिसाब, दोगे कैसे तुम जवाब,

फिर तुझको पड़ेगा पछताना रे ।

रह जायेगा यहीं पर खजाना रे ।

करना सेवा सत्कार, करना हर किसी से प्यार,

न कभी भी किसी का दिल दुखाना रे ।

लेके जग से बुराई मत जाना रे,

अच्छे कर्मो से जीवन सजाना रे ।

करना सेवा सत्कार, करना हर किसी से प्यार,

न कभी भी किसी का दिल दुखाना रे ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।