आजा रे कान्हा आजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आजा रे कान्हा आजा,हमरी नगरिया आजा

प्यासी इन अँखियों की प्यास बुझाजा,

त्रेता में आये थे तुम। द्वापर में आये थे तुम

भक्तों ने जबभी चाहा। दर्सन दिखाए थे तुम

कलियुग में भी हे मोहन। एकबार आजा,

आजा रे कान्हा--------

बिगड़ी बनाने वाले। दुखड़े मिटाने वाले

इतनी हंसी ये सारी। दुनियां बनाने वाले

मेरी भी उजड़ी हुई। दुनियां बसा जा,

आजा रे कान्हा---------

सबका सहारा है तू। आंखों का तारा है तू

कितना अकेला हु मैं। किया क्यू किनारा है तू

प्यासा की बिनती यही। आजा अबतो आजा

आजा रे कान्हा आजा---------

Hemkant jha pyasa

हेमकांत झा प्यासा

9831228059

8789219298

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।