जी चेत दा महिना आ गया

पारंपरिक
माँ गंगा भजन बाबा बालक नाथ भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

जी चेत दा महिना आ गया संग चल पे ने बाबा जी दे दर ते,

छेती गद्दी तोर भगता मथा टेकना बाबा जी दे दर ते,

जी चेत दा महिना आ गया संग चल पे ने बाबा जी दे दर ते,

शाहतलैयां जाके आपा मथा है जी टेकना

अजब नजारा है गरुना देखना ,

चरण गंगा ते पोंछ के करना है इशनान दर तर के

जी चेत दा महिना आ गया संग चल पे ने बाबा जी दे दर ते,

द्योत सिद्ध पोहंच असी गुफा वल जाना है,

चरना च बह के रूसे जोगी नु मनौना है,

जी खाली झोली लेके चले आ औना बाबा जी ने झोलियाँ भर के,

जी चेत दा महिना आ गया संग चल पे ने बाबा जी दे दर ते,

सुंदर गुफा दा जिहने कर ले दीदार वे,

भव सागर च हुँदै ने बेड़े पार पे,

पौनाहारी दूधा धारी दे असी औना है दीदार आज करके,

जी चेत दा महिना आ गया संग चल पे ने बाबा जी दे दर ते,

बाबा जी नु मथा टेक शिव वाडी जावा गे,

गुरुदास बाबा जी नु ओथे भी घुमा वा गे,

मेहरा करू भोले नाथ जी नरिंदर चडाईया जाऊ चड के

जी चेत दा महिना आ गया संग चल पे ने बाबा जी दे दर ते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।