नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का

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॥ पावन पाठ ॥

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का,

सदा ना रहा है, सदा ना रहेगा, ज़माना किसी का,

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का ।

आएगा बुलावा तो जाना पड़ेगा,

सर तुझको आखिर झुकाना पड़ेगा,

वहाँ ना चलेगा बहाना किसी का ।

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का ।

शौहरत तुम्हारी बह जायेगी ये,

दौलत यहीं पर रह जायेगी ये,

नहीं साथ जाता खजाना किसी का ।

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का ।

पहले तो तुम अपने आप को सम्भालो,

कभी नहीं बुराई औरों में निकालो,

बुरा है बुरा जग में बताना किसी का,

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का ।

दुनिया का गुलशन सदा ही रहेगा,

ये तो जहां में लगा ही रहेगा,

आना किसी का जग में, जाना किसी का,

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।