जब विपदा कोई आए

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॥ पावन पाठ ॥

जब विपदा कोई आए जब संकट कोई सताये,

साईं मेरी रक्शा करना साईं मेरी रक्शा करना

मैंने तो देखा इक तेरा द्वारा है,

कोई न और मेरा जग में सहारा है,

जब धीरज टूट जाए हर आशा छुट जाए,

साईं मेरी रक्शा करना साईं मेरी रक्शा करना

सूखे जो डाल चिड़िया सब उड़ जाती है,

मछली तड़प ती वही रह जाती है ,

बिन पंख के मछली जैसी,

लाचार हु मैं भी वैसे,

साईं मेरी रक्शा करना साईं मेरी रक्शा करना

उम्मीद मेरी हर इक तेरे हवाले है,

डगमगाये जब जब नैया तू ही संभाले है,

जब मन ये मेरा हारे और तेरी और निहारे

साईं मेरी रक्शा करना साईं मेरी रक्शा करना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।