झुंझुनूं में विराजे गंगाराम जी

सौरभ मधुकर
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

त्रेता में पधारे श्री राम जी, और द्वापर में आएं घनश्याम जी ।

इस कलियुग में भगतों के खातिर झुंझुनूं में विराजे गंगाराम जी ।

कल्याणी के पावन तट पर कर्मयोग का सार दिया,

महलों में जन्मे लेकिन योगी का पथ स्वीकार किया ।

भक्त-वत्सल कहूं या दीनबंधु, जाने कितने हैं इनके नाम जी,

इस कलियुग में भगतों के खातिर झुंझुनूं में विराजे गंगाराम जी ।

पंचतत्व की काया जिस दिन पंचतत्व में खो जाए,

उससे पहले पंचदेव दरबार के दर्शन हो जाए ।

मिल जाए जो रज मंदिर की, मिल जाएगा बैकुंठ धाम जी,

इस कलियुग में भगतों के खातिर झुंझुनूं में विराजे गंगाराम जी ।

कोई कहता तुझे नारायण, कोई कहता है विष्णु-अवतारी,

तू ही राम है, गंगाराम तू, तू ही मोहन है कलिमलहारी ।

'सौरभ मधुकर' प्रभु तेरे दर पर होती पल में सुनवाई,

गंगा पावन, राम सुहावन, नाम की है बड़ी सकलाई ।

हरी नाम की महिमा है ऐसी, पल में बनते हैं बिगड़े काम जी,

इस कलियुग में भगतों के खातिर झुंझुनूं में विराजे गंगाराम जी ।

भजन गायक - सौरभ मधुकर

भजन रचयिता - मधुकर

संपर्क - 9831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।