साई मेरे साई तेरा रेहम जुदा है

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॥ पावन पाठ ॥

साई मेरे साई तेरा रेहम जुदा है,

साई मेरे साई तेरा कर्म जुदा है,

साई मेरे साई तू सब का खुदा है,

जब भी जो गम में मैं गिरी हु

आके तेरे दर पे मैं गिरी हु,

बादशाओ का बादशाह तू है,

आफतो से तूने किया रिहा है,

जिनका न उनका कोई तू ही पिता है,

गुनाह करना है फितर मेरी बक्शना है आदत तेरी,

बुला नहीं तू भूल गई हु मैं बंदगी और इबातत तेरी,

याहा मिलती माफ़ी सब को तेरा दरबार है,

छोड़ के दर तेरा जाओ किधर मैं

गम ही गम है जाऊ जिधर मैं,

मेरे साई तू इतना कर्म कर,

करू गुलामी तेरी उम्र भर,

तू तो सभी पे किरपा करता सदा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।