अमृत की बरसे फुहार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,

मांगता मुरादे संसार मैया तेरे मंदिरों में,

कभी तू स्वलियो को खाली नही मोड़ ती

किसी की भी आस की डोर नही तोड़ ती,

तेरे जैसा और कोई नही दया वां माँ,

महिमा तेरे द्वार की है सब से महान माँ,

दुखियो का होता उधार,मैया तेरे मंदिरों में,

अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,

बाँटती हो हीरे पने मोती लाजबाब माँ,

तेरी मेहरबानियो का होता न हिसाब माँ,

बिना भेद भाव बेडा सब का तू तारती,

करे जो भरोसा उनके काज वो सवार ती,

सुनी जाती सब की पुकार,मैया तेरे मंदिरों में,

अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,

लाखो ही भिखारी तूने किये धन वां माँ,

अंध्रो को आँखे दी को सुतो को संतान माँ

जग से निराश जो भी शरण तेरे आया माँ,

उस को ही रहमतो की दी है छाया माँ,

मिलता है निर्दोश प्यार मैया तेरे मंदिरों में,

अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।