रो रही भारत माँ रो रहा है ये वतन

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॥ पावन पाठ ॥

रो रही भारत माँ रो रहा है ये वतन,

छोड़ के चलेगे जो उन शहीदों को नमन,

हस के प्राण दे दिए भारत की रक्शा में

लाल जो नही रहे सुना हो गया चमन,

रो रही भारत माँ रो रहा है ये वतन,

बदला लेंगे चुन चुन हम कसम ये खाते है,

चिताओं की आग में ही होगा पाक देहन

रो रही भारत माँ रो रहा है ये वतन,

४० के बदले ४ लाख काटेगे,

मोहित का वादा है मार जायेगे दुश्मन,

रो रही भारत माँ रो रहा है ये वतन,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।