कोई जाये जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कोई जाये जो वृन्दावन, मेरा पैगाम ले जाना,

मैं खुद तो जा नहीं पाऊँ, मेरा प्रणाम ले जाना ।

ये कहना मुरली वाले से मुझे तुम कब बुलाओगे,

पड़े जो जाल माया के उन्हे तुम कब छुडाओगे ।

मुझे इस घोर दल-दल से, मेरे भगवान ले जाना ॥

कोई जाये जो वृन्दावन...

जब उनके सामने जाओ तो उनको देखते रहना,

मेरा जो हाल पूछें तो ज़ुबाँ से कुछ नहीं कहना ।

बहा देना कुछ एक आँसू मेरी पहचान ले जाना ॥

कोई जाये जो वृन्दावन...

जो रातें जाग कर देखें, मेरे सब ख्वाब ले जाना,

मेरे आँसू तड़प मेरी..मेरे सब भाव ले जाना ।

न ले जाओ अगर मुझको, मेरा सामान ले जाना ॥

कोई जाये जो वृन्दावन...

मैं भटकूँ दर ब दर प्यारे, जो तेरे मन में आये कर,

मेरी जो साँसे अंतिम हो..वो निकलें तेरी चौखट पर ।

‘हरिदासी’ हूँ मैं तेरी.. मुझे बिन दाम ले जाना॥

कोई जाये जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना

मैं खुद तो जा नहीं पाऊँ मेरा प्रणाम ले जाना ॥

स्वर एवं रचनाकार :-भैय्या हैप्पी शर्मा (श्री हरीदासी जी) फगवाडा (पंजाब) 098159-59552

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।