महिमा निराली जग में छाई है मइया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महिमा निराली जग में छाई है मइया

बीच भंवर में मोरी अटकी है नईया।

मंगल करनी कल्याण कारी

हाथ में त्रिशूल सोहे शेर की सवारी

खेई दे तू नैया मोरी जग की खेवैया।

बीच भंवर में मोरी अटकी है नैया।

ऊंचा पर्वतवा पर तोहरी कोठारिया

जले ला अखंड दीप आठो पहरिया

पत्थर की मूरत बनके बैठो ना मईया॥

बीच भंवर में मोरी अटकी है नैया॥

सबही कहेला माई मैं हूं गवारा

बीच सभा में आके हमके उबारा

टूटी पतवार मोरी बनजा खेवैया॥

बीच भंवर में मोरी अटकी है नैया॥

सिंगर_मुंशी शर्मा

9011102199

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।