मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा

हर पासे सुख दी आस करा हथ जोड़ के मैं अरदास करा,

मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा

रोक के दुख दी अंधी नु ऐह दुनिया मुकदी जांदी नु,

हूँ बक्श दे किते गुनाहा हु नाले पा दे सिधिया राहां नु

मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा

सारी दुनिया तेनु पुकार रही,

तेरे रहम दा कर इन्तजार रही,

तेरी मेहर जे हो जाए इन वारि हो जायेगी दूर एह महामारी,

मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा

हर पासे हाहा कार होई,

एह दुनिया हूँ लाचार होई,

सुन ले विनती हूँ ब्चेया दी एह गल हूँ वसो बार हुई,

मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।