सोहे बैल सवारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सोहे बैल सवारी अब नाचे लन त्रिपुरारी

डमरुआ डम डम बाजेला

भूत वा पिचाश संगे

सांप गोजर अंगे अंगे

खालें भांग के गोला

मस्त रहेलन भोला

डमरुआ डम डम बाजेला

बाल ब्रम्हचारी के

नर और नारी के

सुनेलन उ पुकार आवेला जे द्वार

डमरुआ डम डम बाजेला

सोहे बैल सवारी अब नाचे लन त्रिपुरारी

डमरुआ डम डम बाजेला

Writter मुंशी शर्मा पुणे

Mo. ९०१११०२१९९

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।