तेरे हथ विच डोर मालका

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे हथ विच डोर मालका तेरे हथ विच डोर,

मुश्किल दे इस समय अन्दर दिसदा न कोई होर,

मालका तेरे हथ विच डोर,

एह दुनिया पई कुरलावे,

कोई राह नजर ना आवे,

फ़ैल रही इस महामारी ते चलदा न कोई जोर मालका,

तेरे हथ विच डोर मालका तेरे हथ विच डोर,

कोई न भूखा प्यासा सोवे बिना माँ दे न बच्चा रोवे,

पुकार रही है दुनिया सारी कर ले इस ते गोर मालका,

तेरे हथ विच डोर मालका तेरे हथ विच डोर,

दुनिया ते जो विपदा आई दुखिया नु वेख जिंग कुरलाई,

सुख शांति करदे रबा केहने आ हथ जोड़,

तेरे हथ विच डोर मालका तेरे हथ विच डोर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।