समय का पहिया चलता है

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

समय का पहिया चलता है,

इस पहिये के साथ किसी का वक़्त बदल ता है,

करे नौकरी मरघट की वो हरीष चन्दर सा दानी,

राज कुंवर की लाश को लेकर आई तारारानी,

उस राजा का पुत्र भी बिलकश में जलता है,

समय का पहिया चलता है,

इस पहिये के साथ किसी का वक़्त बदल ता है,

हो अवध पूरी के रहने वाले तीनो वन में आये,

१४ वर्ष रहे वन में फिर बीते हर्षाये,

हो मात पिता की आज्ञा से ये राज बदलता है,

समय का पहिया चलता है,

इस पहिये के साथ किसी का वक़्त बदल ता है,

काँधी उधारी था वो अर्जुन भीम गधा सा धारी,

भरी सभा में नग्न हुई थी उन पांचो की नारी,

देख रहे थे पांचो पांडव जोर न चलता है,

समय का पहिया चलता है,

इस पहिये के साथ किसी का वक़्त बदल ता है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।