मैं मंगता तेरे दर माँ आज मंगा इक वरदान माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं मंगता तेरे दर माँ आज मंगा इक वरदान माँ,

कण कण दे विच तू वसदी ऐ,

ऐ मेरा वसदा रहे हिन्दुस्तान माँ,

मैं मंगता तेरे दर माँ आज मंगा इक वरदान माँ,

तू आली कुल जहां दी ऐ असि बछड़े हां नादान माँ,

आज कसम तनु तेरे दर दी माँ मेहर करदो मेहरबान माँ,

कण कण दे विच तू वसदी है मेरा वसदा रहे हिन्दुस्तान माँ ,

मैं मंगता तेरे दर माँ आज मंगा इक वरदान माँ,

पला साथी फैलाया दर तेरे मंग मंगदा ना करि निराश माँ,

चण्ड मुंड शुभ निशुंभ मारे दोना दा मिटादे निशाँ माँ,

कण कण दे विच तू वसदी ऐ मेरा वसदा रहे हिन्दुस्तान माँ ,

मैं मंगता तेरे दर माँ आज मंगा इक वरदान माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।