ठोकरे जग की खाए हम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नजर दया की संवारे इक बार करो,

शरण पड़े को बाबा अब सवीकार करो,

दर दर भटके अब तेरे दर आये है,

हारे है हारो का ना इनकार करो,

साथ तेरा साथ तेरा,

साथ तेरा मिल जाए तो फिर सुधर जाएगा ये जनम,

ठोकरे जग की खाए हम,

मेरे श्याम कभी तो खबर लो आस तुमसे लगाये हम,

ठोकरे जग की खाए हम,

करुनानिधि अब हो करूणा दिखलाओ तुम,

धीर छुट ता आकर धीर बंधाओ तुम,

वक़्त दिशा हालत के आगे हारे हम,

काल की बाबा अब तो चाल फिराओ तुम,

तेरी मेहर तेरी मेहर,

तेरी मेहर की जो नजर हो पल में थम जायेगे सारे गम,

ठोकरे जग की खाए हम,

हम ने सुना दरबार तेरा निराला है,

हर वेचारो का बाबा रखवाला है,

आँखों को पड लेता तू आँखों से,

सचा लखदातार तू खाटू वाला है,

तेरी डगर तेरी डगर,

तेरी डगर बाबा चले हम गोलू चाहे किरपा हर दम

ठोकरे जग की खाए हम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।