सोचता हूं के हम कितने मजबूर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे टूटे दिल को उठाना पड़ेगा,

उठा के जिगर से लगाना पड़ेगा,

ये मान लिया कि मैहू नही तेरे काबिल,

मुझे अपने काबिल बनाना पड़ेगा

तेरे प्यार का मारा है मेरा दिल

मेरे सामने तुझको आना ही पड़ेगा

सबनम से क्या फूल खिले

जबतक बरसात ना हो

तेरी तस्वीर से क्या दिलभरे साँवरा

जबतक मुलाकात ना हो

------------------------

सोचता हु के हम कितने मजबूर थे,

क्या से क्या हो गये देखते देखते,

श्याम प्यारे ने बस युही सोगात दी,

गम जुदा हो गये देखते देखते,

देख कर मेरी हालत पे दुनिया हसे,

गैर अपने हुए देखते देखते,

श्याम सुंदर ने यु हाथ पकड़ा तेरा,

और सब रह गए देखते देखते,

सोचता हु के हम कितने मजबूर थे,

तूने ऐसा करिश्मा दिखा ही दिया,

ऐसा जादू किया देखते देखते,

तेरी चोकठ पे आ कर ये सिर रख दियां,

झोलिय भर गई देखते देखते,

सोचता हु के हम कितने मजबूर थे,

मेरी राहो में कांटे ही कांटे बिशे ,

फूल वो बन गए देखते देखते,

मेरे अरमान पुरे किये श्याम ने,

जिन्दगी बन गई देखते देखते,

H K प्यासा

9831228059:

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।