बाबा मुझे दर पे बुलाना तेरा धाम रूनिचा है सुहाना

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा मुझे दर पे बुलाना,

तेरा धाम रूनिचा है सुहाना ।

मैं हर साल सोचूं मैं जाऊं रूनिचा,

मगर कोई काम निकलता है दूजा ।

बाबा दर पे मुझको बुलाना,

तेरा धाम रूनिचा है सुहाना ॥१॥

किस्मत वाले है जो वो हर साल जाते,

रूनिचा मे जाकर वो जम्मा जगाते ।

बाबा मुझे अब ना रुलाना,

तेरा धाम रूनिचा है सुहाना ॥२॥

तेरे दर पे भक्तो का लगता है रेला,

मुझे कब बुलाओगे अजमल के लाला ।

सेवक हू मे तेरा पुराना,

तेरा धाम रूनिचा है सुहाना ॥३॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।