त्रिशूल रूप धारिणीम झुंझुनू निवासिनीम

सौरभ मधुकर
महादेव भजन रानी सती दादी भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,

महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

रण प्रियाम बिरांग नाम गुर सहाय नन्दिनीम ,

सौभद्र-वाम अंगिनीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,

महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

भक्त-वतसलाम सतिम , स्वास्ति रूप धारिणीम ।

सौभाग्य-वर प्रदायनीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,

महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

गोयल सुताम , पति व्रताम , यवन दल विनाशिनीम ,

शत्रु-दाल विदारिणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,

महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

त्रिशूल रूप धारिणीम , झुंझुनू निवासिनीम ,

महासती नारायणीम , नमामि सत-शिरोमणिम ।

भजन गायन एवं संगीत विषय चयन - मधुकर

अभिनय - सौरभ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।